नीमचौक स्थानक पर होगी ‘नवकार रैकी’ की विशेष साधना
रतलाम 6 अगस्त। “यह संसार एक पागलखाने के समान है, जहाँ ऊपर से पाप और आश्रव का नल पूरी गति से लगातार चल रहा है और नीचे आत्मा रूपी घड़े में पाप निरंतर भरता जा रहा है। हम घड़े में से पानी उछाल-उछाल कर बाहर तो फेंक रहे हैं, लेकिन पाप कम नहीं हो रहे। जब तक आश्रव रूपी नल को बंद नहीं किया जाएगा, नया पाप आता रहेगा। पाप के इस द्वार को बंद करना ही सच्ची धर्म श्रद्धा है।” यह ओजस्वी विचार महासती प्रफुल्ला श्री म.सा. ने अपने मुखारविंद से नीमचौक जैन स्थानक पर धर्मसभा को संबोधित करते हुए व्यक्त किए।
महासती जी ने धर्म की महिमा बताते हुए कहा कि धर्म उस ‘द्वीप’ और ‘दीप’ के समान है, जहाँ संसार रूपी समुद्र में थका-हारा प्राणी पहुँचकर शांति पाता है और जो अज्ञान के अंधकार में प्रकाश फैलाता है। इस संसार रूपी समुद्र में कर्म रूपी बड़े-बड़े मगरमच्छ हैं और स्वार्थ का ज्वार-भाटा आता रहता है। जीवन के हर क्षण और हर स्थान पर धर्म का साथ होना चाहिए। पग-पग पर धर्म-सम्मत आचरण ही सच्ची श्रद्धा की पहचान है। महासती जी ने व्यावहारिक जीवन का उदाहरण देते हुए कहा कि जब देवरानी, जेठानी और ननंद के बच्चों व स्वयं के बच्चों में भेद समाप्त हो जाए, वही धर्म श्रद्धा की वास्तविक अभिव्यक्ति है। महासती जी ने कहा कि ब्याज का चक्र तो एक बार समाप्त हो सकता है, लेकिन कर्म का चक्र कभी समाप्त नहीं होता। जिस प्रकार फटा हुआ कपड़ा और अधिक फटता चला जाता है, उसी प्रकार कर्मों का जाल बढ़ता रहता है। यह कर्म मनुष्य को क्षण भर हंसाते हैं और जीवन भर रुलाते हैं।
श्रीसंघ मीडिया प्रभारी निलेश बाफना ने बताया की श्रीसंघ द्वारा पूज्य महासती प्रफुल्ला श्री जी मासा के पावन सानिध्य में नीमचौक स्थानक पर दिनांक 07, 08 एवं 09 अगस्त को प्रातः 06:00 बजे से 07:00 बजे तक विशेष ‘नवकार रैकी’ की साधना करवाई जाएगी। नगर की समस्त धर्मप्रेमी जनता से भावभीना आग्रह किया है कि वे अधिक से अधिक संख्या में उपस्थित होकर इस आध्यात्मिक साधना का लाभ उठाएं।