

जावरा 9 अगस्त। स्थानकवासी जैन संघ हल्लदकेरी मैसूर के तत्वावधान में स्थानक भवन में अखिल भारतीय जैन दिवाकर विचार मंच, नई दिल्ली के राष्ट्रीय कार्यकर्ता अधिवेशन के समापन समारोह का आयोजन हुआ। समारोह को संबोधित करते हुए राष्ट्रसंत कमल मुनि कमलेश ने कहा कि प्राणी मात्र के प्रति समरसता और सद्भाव का भाव जब तक आत्मा में जागृत नहीं होता, तब तक मनुष्य वास्तविक धार्मिकता के मार्ग में प्रवेश नहीं कर सकता। समरसता ही सभी धर्मों का मूल आधार, मोक्ष का मार्ग और आध्यात्मिकता का प्राण है।
उन्होंने कहा कि समरसता के माध्यम से हृदय में प्रेम, मैत्री, करुणा और सद्भाव का संचार होता है। जिस मन-मंदिर में ये भाव विद्यमान होते हैं, वहीं परमात्मा का निवास होता है। समरसता स्वयं अहिंसा है और जहां समरसता समाप्त होती है, वहीं हिंसा एवं पाप का प्रारंभ हो जाता है। विचारों में क्रूरता, व्यवहार में कुटिलता और आचरण में अपराध की प्रवृत्ति जन्म लेने लगती है।
राष्ट्रसंत ने कहा कि समरसता और कट्टरता में 36 का आंकड़ा है। कट्टर विचारधारा सद्गुणों को नष्ट कर हिंसा की जननी बन जाती है। भारत विभिन्न धर्मों, संप्रदायों, भाषाओं और प्रांतों वाला देश है। यदि सभी कट्टरता का नारा देने लगें तो राष्ट्रीय एकता को गंभीर खतरा उत्पन्न हो सकता है। उन्होंने कहा कि धर्म से बढ़कर राष्ट्र है और राष्ट्र की सुरक्षा में ही हम सबकी सुरक्षा निहित है। उदारता, समन्वय, प्रेम, दया और करुणा ही धर्म के वास्तविक सिद्धांत हैं।
दिवाकर मंच के राष्ट्रीय संरक्षक अभय सुराणा ने अपने संदेश में कहा कि जिस संत के जीवन में सफलता, विचारों में उदारता और आचरण में सात्विकता होती है, वह किसी भी संप्रदाय का हो, विश्व पूजनीय बन जाता है।
राष्ट्रीय अध्यक्ष तेज प्रकाश मेहता ने कहा कि वही संत महान है जो विषम परिस्थितियों को समभाव और सौहार्दपूर्ण वातावरण में बदलने की क्षमता रखता है। मध्य प्रदेश शाखा के अध्यक्ष विजय खटोड़ ने संगठन को मजबूत बनाने पर जोर दिया। राष्ट्रीय महिला शाखा की महामंत्री निकिता शांति ने कहा कि समाज में शांति और सद्भाव का वातावरण बनाने के लिए सभी को सामूहिक रूप से प्रयास करना चाहिए।
महिला शाखा की राष्ट्रीय प्रचार मंत्री ललिता जोगण, मुंबई ने बताया कि सुप्रीम काउंसिल ऑफ अरब क्लैंस के प्रेसिडेंट अमीर अब्दुल रज्जाक शेख ईसा द्वारा राष्ट्रसंत कमल मुनि कमलेश को विश्व शांति एवं आध्यात्मिक क्षेत्र में किए गए विशिष्ट कार्यों के लिए मानद डॉक्टरेट की उपाधि से सम्मानित किया गया है। इस अवसर पर श्रावक संघ एवं दिवाकर मंच के कार्यकर्ताओं ने गुरुदेव के प्रति सम्मान एवं शुभकामनाएं व्यक्त कीं। तमिलनाडु की प्रमुख सरोज कोठारी ने कहा कि विश्व बंधुत्व की भावना को साकार किए बिना सच्ची शांति स्थापित नहीं हो सकती। कमल दिवाकर तीर्थ डूंगला के कोषाध्यक्ष दुर्गाशंकर ने भी अपने विचार व्यक्त किए।
समारोह में संघ की ओर से तेज प्रकाश मेहता, रमेश मेहता, उत्सव भनावत, महावीर जैन, विजय खटोड़, पवन जैन, डॉ. आभा गांधी, ललिता जोगण एवं सरोज कोठारी का सम्मान किया गया। कार्यक्रम में विभिन्न राज्यों से आए दिवाकर मंच के पदाधिकारी एवं कार्यकर्ता उपस्थित रहे। उक्त जानकारी अखिल भारतीय जैन दिवाकर विचार मंच के वरिष्ठ मार्गदर्शक अभय सुराणा ने दी।