आलोचना, प्रतिक्रमण और प्रायश्चित  से ही जीवन में आ सकता है सच्चा निखार – महासती प्रफुल्ला श्री म. सा.

रतलाम 11 अगस्त। नीमचौक जैन स्थानक में आयोजित भव्य धर्मसभा को संबोधित करते हुए महासाध्वी प्रफुल्ला श्री म. सा.ने उत्तराध्ययन सूत्र के २९वें अध्याय की महत्ता पर प्रकाश डाला। उत्तराध्ययन सूत्र के प्रसंग का उल्लेख करते हुए बताया गया कि जब गौतम स्वामी ने भगवान महावीर से गुरु और साधर्मी की सेवा के लाभ के बारे में पूछा, तो प्रभु ने फरमाया कि सेवा भक्ति से जीवन में विनय गुण की वृद्धि होती है।
महासतिया जी ने बताया गया कि जिस प्रकार व्यक्ति कपड़ा या भूमि खरीदते समय उसकी गुणवत्ता (पोत) परखता है, ठीक उसी प्रकार समाज में भी विनयवान व्यक्ति की गुणवत्ता और कद्र होती है। विनय गुण से सुशोभित व्यक्ति को हर कोई सहर्ष अपनाता है। —’आलोचना करने का क्या लाभ है?’—का उत्तर देते हुए प्रभु महावीर के वचनों को रेखांकित किया गया। अपने भीतर झांकना और कर्मों की आलोचना करना ही आत्म-शुद्धि का मार्ग है। जैसे कपड़े की धूल झटकने से, सामान्य दाग धोने से और जिद्दी दाग ड्राई क्लीनिंग से साफ हो जाते हैं, वैसे ही जीवन की छोटी-मोटी गलतियों को आलोचना, प्रतिक्रमण और प्रायश्चित द्वारा धोया जा सकता है। लेकिन यदि समय पर प्रायश्चित न किया जाए, तो पाप ‘निकाचित कर्म’ बन जाते हैं, जिन्हें भोगे बिना कोई छुटकारा नहीं मिलता। उदाहरण से समझाई समय पर प्रायश्चित की आवश्यकता प्रवचन में एक व्यावहारिक उदाहरण देते हुए बताया गया कि पैर में चुभा कांटा यदि शुरुआत में सुई से न निकाला जाए, तो बाद में वह नासूर बन जाता है और पूरे शरीर में जहर फैलने पर अंग तक काटना पड़ता है। ठीक इसी तरह, जीवन में मिथ्यात्व, दर्शन और माया रूपी शल्य (कांटों) को तुरंत निकाल फेंकना चाहिए, अन्यथा देर होने पर दुष्परिणाम भुगतने ही पड़ते हैं।
प्रवचन के दौरान महासती श्री महिमा श्री म.सा. के विचारों को उद्धृत करते हुए जीवन में चार बातों का ध्यान रखना आवश्यक है: 1. गलत वस्तु से बचें: मोबाइल आदि के अत्यधिक प्रयोग से समय की बर्बादी से बचें। 2. गलत स्थान से बचें: शराब जैसी जगह पर न जाएं, भले आप सेवन न करते हों, अन्यथा छवि धूमिल होगी। 3.गलत साहित्य से बचें: कुविचारों से बचने के लिए हमेशा सद्ग्रंथों और अच्छी पुस्तकों का अध्ययन करें। 4.गलत व्यक्ति की संगत से बचें: दुष्प्रवृत्तियों वाले लोगों का साथ तुरंत छोड़ें।
यदि व्यक्ति इन चार नियमों को अपना ले, तो उसका जीवन पापमुक्त और संयमित बन सकता है। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने उपस्थित होकर धर्म लाभ लिया।

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