रतलाम 14 अगस्त। प्रभु महावीर ने अपनी दिव्य देशना में जीने की कला बताई है। उसके मुताबिक जिसको जीना आ गया, उसका कल्याण हो जाता है। वर्तमान में मनुष्य जगत में लोग कैसे जी रहे है। आत्मा के साथ जो जीता है, उसका कल्याण हो जाता है। भगवान ने आत्मा के साथ रहने का सबसे सुन्दर उपाय सामायिक साधना बताई है।
यह उदगार मालव केसरी पूज्य गुरुदेव सौभाग्यमल जी मसा के सुशिष्य, रत्नपुरी के रत्न, श्रमण संघीय प्रवर्तक पूज्य श्री प्रकाश मुनिजी मसा निर्भय ने व्यक्त किए। मोहन टाकीज स्थित श्री सौभाग्य प्रकाश दरबार में प्रवचन के दौरान उन्होंने कहा कि सांसारी व्यक्ति धर्म करने की कोशिश तो करता है, लेकिन धर्म में जीता नहीं है। सामायिक में सबसे पहले नवकार महामंत्र है और इस महामंत्र का पहला ही संदेश नमन करना है अर्थात अहंकार छोड दीजिए और नमन कीजिए। द्रव्य नमन शरीर से होता है और भाव नमन श्रद्धा से किया जाता है। भगवान ने सामायिक साधना के माध्यम से 48 मिनट अपने साथ रहने के बताए है। आत्मा और परमात्मा के बीच महात्म बनकर यही मंत्र कल्याण का मार्ग बताता हैं
आरंभ में उपप्रर्वतनी, महासती, प्रवचन प्रभाविका श्री सुमनप्रभाजी मसा ने संबोधित किया। इस मौके पर प्रवर्तकश्री से कई तपस्वियों ने विभिन्न तप आराधना के प्रत्याख्यान लिए। इस दौरान सेवाभावी श्री दर्शनमुनिजी मसा, उपप्रर्वतनी, महासती, प्रवचन प्रभाविका श्री सुमनप्रभाजी मसा ठाणा-8 एवं महासती श्री चंदनबालाजी मसा एवं सेवाभावी श्री कल्पनाजी मसा मंचासीन रहे। संचालन चातुर्मास समिति के मंत्री रखब चत्तर ने किया। इस दौरान श्री धर्मदास जैन श्री संघ सदस्यगण, श्री धर्मदास जैन मित्र मंडल ट्रस्ट, श्री सौभाग्य तीर्थ ट्रस्ट, श्री सौभाग्य जैन नवयुवक मंडल, श्री सौभाग्य प्रकाश युवक मंडल, श्री सौभाग्य जैन महिला मंडल, श्री सौभाग्य अणु बहु मंडल एवं श्री सौभाग्य प्रकाश बालक-बालिका मंडल के सदस्यगण उपस्थित रहे।