भगत सिंह ने विचारों से क्रांति का सूत्रपात किया – प्रो. चौहान

रतलाम । शहीद भगत सिंह ने अपने विचारों से क्रांति का सूत्रपात किया और अंग्रेजों के सामने चुनौती पेश की । भगत सिंह लोकतंत्र की स्थापना और उसके स्वप्न को साकार करने के लिए देश पर कुर्बान हो गए । उनके विचारों को आगे बढ़ाना , उनके विचारों से प्रेरणा लेना और उनके पथ पर चलना ही सच्ची श्रद्धांजलि है।
उक्त विचार शहीद भगत सिंह की जयंती पर प्रोग्रेसिव स्टडी सर्किल द्वारा आयोजित कार्यक्रम को संबोधित करते हुए वरिष्ठ कवि और अनुवादक प्रो. रतन चौहान ने व्यक्त किए । उन्होंने कहा कि भगत सिंह न सिर्फ अपने विचार से बल्कि अपने आचरण से भी समाज के समक्ष आदर्श प्रस्तुत करते रहे । यही कारण है कि उन्हें आज भी सम्मान के साथ याद किया जाता है ।
वरिष्ठ रंगकर्मी युसूफ जावेदी ने इस अवसर पर कहा कि भगत सिंह की दृष्टि में सामाजिक समानता, आर्थिक समानता ही देश का आधार थे । वे हर समय ऐसे भारत की संकल्पना करते रहे , जहां इंसानों के बीच कोई भेदभाव नहीं होगा और सभी को उनका हक़ मिलेगा। ऐसा भारत ही भगत सिंह के सपनों का भारत होगा । वरिष्ठ शायर सिद्दीक़ रतलामी ने कहा कि भगत सिंह न केवल क्रांतिकारी थे बल्कि अच्छे शायर भी थे ।उन्होंने अपनी शायरी के माध्यम से भी युवाओं को अपनी और आकर्षित किया । वरिष्ठ कवि रणजीत सिंह राठौर ने कहा कि भगत सिंह की जेल डायरी उनके जीवन का जीवन का दस्तावेज है । इसमें उनके विचार स्पष्ट व्यक्त हुए हैं।
भगत सिंह की पत्रकारिता पर पुस्तक ‘समर में शब्द’ के लेखक आशीष दशोत्तर ने कहा कि भगत सिंह के भीतर का पत्रकार बहुत मज़बूत था । उन्होंने अपनी लेखनी के जरिए उस समय के समाचार पत्रों में जो आलेख लिखे , वे युवा वर्ग के लिए प्रेरणा बने। कार्यक्रम में आई.एल.पुरोहित , इंदु सिन्हा,नरेंद्र सिंह पंवार , जुझार सिंह भाटी , कीर्ति शर्मा, अनीस ख़ान, पद्माकर पागे , गीता राठौर, चरणसिंह जादव, कला डामोर ने भी विचार व्यक्त किए ।
प्रारंभ उपस्थित जनों ने भगत सिंह के चित्र पर मलयार बनकर उनका स्मरण किया। इस अवसर पर जनवादी लेखक संघ की प्रांतीय कार्यकारिणी में मनोनीत पदाधिकारियों का सम्मान भी किया गया। कार्यक्रम का संचालन मांगीलाल नगावत ने किया और आभार एस.के. मिश्रा ने व्यक्त किया। इस अवसर पर सुधिजन मौजूद थे।

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