मिथ्यात्व आत्मा पर कब्जा किए बैठे गुंडे के समान है, इसे हटाना ही सबसे कठिन साधना – मुनिश्री सुधासागर जी

इंदौर (राजेश जैन दद्दू) । दलालबाग में आयोजित धर्मसभा में विद्या सुधा देशना मंडप में तीर्थ चक्रवृती मुनिपुंगव श्री 108 सुधासागर जी महाराज ने मिथ्यात्व, सम्यक दर्शन और वैराग्य के वास्तविक स्वरूप पर गहन प्रवचन दिया। उन्होंने कहा कि मोक्षमार्ग में सबसे बड़ा बाधक बाहरी संसार नहीं, बल्कि आत्मा पर अनादिकाल से कब्जा जमाए बैठा मिथ्यात्व है। धर्म समाज प्रचारक राजेश जैन दद्दू ने बताया कि महाराजश्री ने उदाहरण देते हुए कहा कि मकान बनाना सरल है, लेकिन किसी शक्तिशाली व्यक्ति द्वारा कब्जा कर लिए जाने पर उसे हटाना अत्यंत कठिन हो जाता है। वैसे ही आत्मा हमारी है, पर मिथ्यात्व ने उस पर अनादिकाल से कब्जा कर रखा है। सम्यक दर्शन का अर्थ केवल नई वस्तु प्राप्त करना नहीं, बल्कि पहले उस गलत दृष्टि और गलत मान्यता को हटाना है जिसने आत्मा को बांध रखा है।
उन्होंने कहा कि सच्चे देव-शास्त्र-गुरु को मानना, मंदिर जाना और पूजा करना सरल है, लेकिन वास्तविक प्रश्न यह है कि क्या हमने अपनी गलत मान्यताओं और मिथ्यात्व का त्याग किया है। सच्चे को स्वीकार करना आसान है, गलत को छोड़ना कठिन है। दो लड्डू दोनों हाथों में नहीं रखे जा सकते, वैसे ही सम्यक दृष्टि और मिथ्यात्व को एक साथ नहीं रखा जा सकता।
वैराग्य की परिभाषा स्पष्ट करते हुए महाराजश्री ने कहा कि संसार के दुखों से परेशान हो जाना वैराग्य नहीं है। व्यापार में नुकसान, धोखा या अपमान के कारण संसार बुरा लगना स्थायी वैराग्य नहीं, परिस्थिति बदलते ही ऐसे भाव बदल जाते हैं। सच्चा वैराग्य बाहरी परिस्थितियों से नहीं, संसार की वास्तविकता को समझने से उत्पन्न होता है। जहाँ केवल निंदा, क्रोध और अशांति है, वहाँ वैराग्य की गहराई समझना अभी बाकी है। वास्तविक वैराग्य भीतर शांति, विवेक और आत्मचिंतन पैदा करता है।
उन्होंने कहा कि धर्म का प्रश्न यह नहीं कि हमने कितनी पूजा-व्रत किए, बल्कि यह है कि हमने भीतर से क्या छोड़ा। मिथ्यात्व को पहचानना और सत्य में स्थिर होना ही आत्मजागरण है।
इंदौर प्रवास के दौरान छत्रपति नगर में हजारों श्रद्धालु प्रतिदिन प्रातः धर्मलाभ ले रहे हैं। धर्मसभा में किसी प्रकार की राशि की बाध्यता नहीं है, हर व्यक्ति समान रूप से संत सानिध्य का लाभ ले रहा है। धर्म किसी राशि का मोहताज नहीं, धर्म श्रद्धा और आत्मजागरण का नाम है।
धर्मसभा में सपना मनीष गोधा नवीन, आनंद गोधा, विजय पाटोदी, शीलाजी डोडिया, सुशीला पाटनी, मुक्ता जैन अशोक डोशी, हर्ष जैन, संजय पाटोदी राहुल सेठी, भूपेंद्र भोपाली, अरविंद अखिलेश सौधीया सहित बड़ी संख्या में समाजजन उपस्थित रहे।

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