सामाजिक समरसता का अनुपम उदाहरण है श्री केसरियाजी तीर्थ, देशभर से 600 से अधिक पदाधिकारी हुए शामिल




तलाम। अखिल भारतीय श्री जैन श्वेतांबर मूर्तिपूजक युवक महासंघ का 20वां राष्ट्रीय अधिवेशन राजस्थान स्थित श्री केसरियाजी तीर्थ में दो दिवसीय आयोजन के रूप में उत्साह और गरिमापूर्ण वातावरण में संपन्न हुआ। अधिवेशन में मध्यप्रदेश, गुजरात, महाराष्ट्र, कर्नाटक, राजस्थान सहित देश के विभिन्न राज्यों से राष्ट्रीय एवं प्रदेश स्तर के 600 से अधिक पदाधिकारी एवं कार्यकर्ता शामिल हुए।
श्री केसरियाजी तीर्थ सामाजिक समरसता का भी अनुपम उदाहरण प्रस्तुत करता है। यहां जैन समाज के दिगंबर एवं श्वेतांबर बंधुओं के साथ आदिवासी समाज द्वारा केसरियानाथ को कालाबाबा के रूप में आस्था के साथ पूजा जाता है। वहीं सनातन समाज के श्रद्धालु भी समय-समय पर यहां पूजा-अर्चना करते हैं। तीर्थ की प्राचीन परंपरा के अनुसार जलधंडी से निर्धारित 24 मिनट के अंतराल पर घंटा बजाकर समय परिवर्तन का संकेत दिया जाता है।
अधिवेशन के प्रथम सत्र में श्री केसरियानाथ के चित्र पर माल्यार्पण एवं दीप प्रज्वलन किया गया। इसके पश्चात जैन समाज के ध्वजारोहण का कार्यक्रम राष्ट्रीय व्यापारी कल्याण बोर्ड, भारत सरकार के चेयरमैन सुनील सिंधी, अहमदाबाद एवं महासंघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष हरेंद्र भाई शाह, पुणे के करकमलों से संपन्न हुआ। राष्ट्रीय पदाधिकारियों एवं कार्यकारिणी सदस्यों द्वारा अतिथियों एवं प्रतिनिधियों का स्वागत किया गया।
इसके बाद महासंघ का वार्षिक प्रतिवेदन प्रस्तुत किया गया। देश के विभिन्न राज्यों से आए राष्ट्रीय एवं प्रदेश पदाधिकारियों ने अपनी-अपनी इकाइयों की गतिविधियों एवं कार्यों का प्रतिवेदन प्रस्तुत किया। रतलाम नगर एवं जिले की इकाई का प्रतिवेदन राष्ट्रीय कार्यकारिणी सदस्य राजेश रांका ने प्रस्तुत किया।
अगले सत्र में ‘अपनों से अपनी बात’ कार्यक्रम आयोजित हुआ, जिसमें विभिन्न पदाधिकारियों ने संगठन एवं समाज से जुड़े विषयों पर अपने विचार रखे और महत्वपूर्ण सुझाव प्रस्तुत किए। रात्रि में राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक आयोजित की गई, जिसकी अध्यक्षता राष्ट्रीय संगठन मंत्री विकास बोहरा ने की। बैठक में राष्ट्रीय कार्यकारिणी सदस्य राजेंद्र दरड़ा, राजेश रांका, निलेश चोरनिया सहित अन्य पदाधिकारियों ने भाग लिया।
जनगणना में प्रमुख रूप से ‘जैन’ लिखाने का आह्वान
राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक में महत्वपूर्ण प्रस्ताव पारित किया गया। देश की सभी इकाइयों से अनुरोध किया गया कि आगामी सरकारी जनगणना के दौरान जैन समाज के प्रत्येक व्यक्ति को अपनी गोत्र अथवा सरनेम के साथ प्रमुख रूप से ‘जैन’ लिखवाना चाहिए, ताकि समाज की वास्तविक जनसंख्या का आंकड़ा सामने आ सके। राष्ट्रीय एवं प्रदेश पदाधिकारियों से भी आग्रह किया गया कि वे समाजजनों तथा साधु-संतों के बीच इस विषय को लेकर जनजागरण अभियान चलाएं और अधिक से अधिक लोगों को इसके प्रति जागरूक करें।
अधिवेशन में रतलाम शहर एवं जिले से जिला संरक्षक जयवंत कोठारी, जिला अध्यक्ष मुकेश पगारिया, नगर इकाई अध्यक्ष जितेंद्र चोपड़ा, उपाध्यक्ष राजेश पोरवाल काकड़ीवाला, सचिव सिद्धार्थ कोठारी, प्रचार सचिव शुभम तलेरा, कार्यकारिणी सदस्य मुकेश धाकड़ सहित जिले के अनेक राष्ट्रीय एवं प्रदेश पदाधिकारी और कार्यकर्ता उपस्थित रहे।