प्रत्येक आत्मा में निर्मल भाव से परमात्मा के दर्शन करने वाला ही परमात्मा को प्राप्त कर सकता है – राष्ट्रसंत कमलमुनि कमलेश

मेहसाना (सिमंधर स्वामी जैन मंदिर 25 मई 2021) । परस्पर भेदभाव की दीवारों को दिलों से ध्वस्त करके प्राणी मात्र के प्रति समान भाव का मन में संचार नहीं होगा तब तक आत्म साधना की ओर अग्रसर नहीं हो सकते । उक्त विचार राष्ट्र संत कमलमुनि कमलेश ने मेहसाणा सिमंधर स्वामी जैन मंदिर विदाई समारोह को संबोधित करते कहा कि धर्म उपासना करते हुए भी ऊंच-नीच एवं राग द्वेष के भावों का निर्माण होता है वह धर्म अभी पाप के रूप में परिवर्तित हो जाता है । उन्होंने कहा कि विषम भाव से कुंठा का निर्माण होता है उस से निर्मित होने वाली मन में गांठ कैंसर की गांठ श्री अनंत गुना ज्यादा खतरनाक होती है ।
राष्ट्रसंत कमलमुनि ने बताया कि भेद भाव से डिप्रेशन ब्लड प्रेशर हार्ड अटैक एवं मानसिक रोगों का शिकार बनता है तनाव से मुक्त करें उसी का नाम धर्म है । राष्ट्रसंत ने स्पष्ट कहा कि प्रत्येक आत्मा में निर्मल भाव से परमात्मा के दर्शन करने वाला ही परमात्मा को प्राप्त कर सकता है ।
जैन संत ने कहा कि अपने और पराए के भाव दिल में पैदा होते हैं वहां पर स्वयं के गुणों का विनाश और आत्मा का पतन शुरू हो जाता है। मेहसाना मूर्तिपूजक संघ के ट्रस्टी मनीष भाई पटवा भावेश भाई शाह नीता की सेवा का लाभ लिया दीपक जैन निरंतर सेवा में लीन रहे आज मंगल विहार किया 30 मई से 6 जून तक शंखेश्वर पाश्र्वनाथ रुकने की संभावना है विहार में पुलिस प्रशासन के अधिकारियों ने अनुपम सेवा का लाभ लिया

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