

रतलाम। समय-समय पर देखने में आया है कि कई शासकीय और अशासकीय मंदिरों पर कई लोगों ने जो वैदिक विधानों से अनभिज्ञ हैं ट्रस्ट बनाकर अपना आधिपत्य स्थापित कर रखा है और यह ट्रस्ट द्वारा आधिपत्य करने के उपरांत यहां की व्यवस्थाओं को अपने मनमाने तरीके से संचालित करते आ रहे हैं , साथ ही समाज में कुछ स्थिति इस प्रकार की भी देखने को मिल रही हैं कि जहां पर विप्रबंधुओ ब्राह्मण देवता जो कर्मकांड कराते हैं उनका कई समुदाय धार्मिक आयोजन में समाज में हंसी मजाक कर अपमान किया जा रहा है अपशब्दों का प्रयोग किया जा रहा है कईमंदिरों में भी उनको पारितोषिक पर रखा जाता है तथा चढ़ावे की राशि समितियां रखती हैं और कई लोग भक्तजन उनको आने वाले दर्शनार्थी तू तू के शब्द उपयोग करते आ रहे हैं तथा उनका अपमान हो रहा है , कुछ वैदिक विधानों से अनभिज्ञ समिति जो वहां की समितियां बनाई जाती है वह भी उनको अपमानित करती हैं जितने भी शासकीय और अशासकीय मंदिर है माननीय मुख्यमंत्री जी सहित धर्मस्व विभाग से रतलाम के सभी विप्रबंधुओ संगठित रूप से प्रार्थना आवाहन करते हैं तथा उन्हें पत्रों क़े माध्यम से वैदिक जाग्रति ज्ञान-विज्ञान पीठ द्वारा विप्रबन्धुओ की व्यथाओं को लिखित रूप में पहुँचाया जा रहा हैं ताक़ि समस्त शासकीय और अशासकीय मंदिरों का जो आधिपत्य हैं वह वैदिक विधानों को जानने वाले बुद्धिवर्गो व वहाँ पर जो पुजारी जी है उनके आधिपत्य में दिया जाए ताकि उस व्यवस्था का संचालन पूर्ण वैदिक पद्धति क़े नियम गुरुकुल पद्धति अनुसार किया जा सके , क्योंकि विषय गंभीरता से देखने में आया है कि विप्रबंधुओ द्वारा बतलाए गए वैदिक नियमों को दरकिनार कर कुछ मन्दिर की समिति अपने मनमाने ढंग से हर त्यौहार व धार्मिक उत्सव पर अपने मनमाने ढंग से वैदिक नियम के विपरीत अनुष्ठान पूजन ब्राह्मणदेव , पुजारी जी से करवाती है , साथ कुछ बड़े त्योहारों पर मुख्य अतिथि क़े विलंब से आने पर आरती को विलंब से करना व आरती को छोटा या बड़ा करने हेतु पंडित जी पर दबाव बनाया जाता है तथा समितियों के अनुरूप कार्य न करने पर ब्राह्मणदेव पर मंदिर से हटाने के लिए धमकाया जाता है ।
साथ ही कई देव स्थानों पर देखने में आया हैं कि कुछ समितियो द्वारा पुराने मंदिरों के चारों ओर व्यवसायीकरण कर दिया गया है जिसके कारण मंदिर की शांति पूर्णता भंग हो जाती है तथा वहां होने वाले कुछ विवाहादि आयोजन में खुलकर शराब इत्यादि का भी प्रयोग किया जाता है ।
वैदिक जाग्रति पीठ क़े अध्यक्ष पं.चेतन शर्मा ने बतलाया की इसीलिए मंदिर की गरिमा और सम्मान को स्थापित करने हेतु समितियों क़े आधिपत्य से मंदिरों को पूर्णतः मुक्त किया जाये या वैदिक विधानों को जानने वाले , तथा वैदिक विधान करवाने वाले पूजन कराने वाले पण्डित जी विप्रबन्धुओ के अधीन मंदिर किया जाए , ताकि वहाँ वैदिक विधि से विप्रबंधुओं की शिक्षा तथा वैदिक धार्मिक क्रियाकलापों के अनुरूप ही सारी व्यवस्थाओ क़ा संचालन किया जा सके ।
जाग्रति पीठ क़े संस्थापक पं.संजयशिवशंकर दवे ने बतलाया की विगत लम्बे समय से विप्रबन्धु ब्राह्मणदेव किसी न किसी रूप में धार्मिक आयोजनों में मंदिरों में अपमान सहता आ रहा है लेकिन परिस्थितियां बदल गई है इसीलिए ब्राह्मणदेव अब कदापि अपमान नहीं सहेगा।
वैदिक जाग्रति ज्ञान-विज्ञान पीठ क़े तत्वाधान में इन्हीं बिंदुओं को ध्यान में रखते हुए आज स्थानीय कालिका माता मंदिर प्रांगण पर रतलाम के विद्वत विप्रजनों ब्राह्मण देवो ने सामूहिक रूप से वैदिक मंत्रों का उच्चारण कर समस्त मंदिरों की समितियों को संकेत दिया की मंदिर पर मनमानी छोड़ दें तथा किसी भी प्रकार की विप्रबंधुओं के अपमान को अब कदापि सहन नहीं किया जाएगा , इन्हीं उद्देश्य को ध्यान में रखते हुए सभी विप्रबंधुओं ने माँ कालिका माता मंदिर पर सभी समितियों के पदाधिकारियों की सद्बुद्धि के लिए सद्बुद्धि यज्ञ किया गया ।
हवन के उपरांत माननीय मुख्यमंत्री जी व धर्मस्व विभाग में पत्र पोस्ट किया गया व सभी विप्रबंधुओं ने पूर्ण गणवेश ब्राह्मण परिधान में सामूहिक रूप से गायत्री टॉकीज में द कश्मीर फाइल फ़िल्म को देखा गया।
इस आयोजन में वैदिक जाग्रति ज्ञान विज्ञान पीठ क़े संस्थापक ज्योतिषाचार्य पं.संजयशिवशंकर दवे , जिला अध्यक्ष पं.चेतन शर्मा ,पं.राममिलन जी शास्त्री पं.श्रद्धेय शर्मा , पं. कान्हा शर्मा , पं.जितेंद्र नागर ,पं.उदीय व्यास , पं. मुकेश शर्मा ,पं.विकास नागर ,पं.हरीश जी चतुर्वेदी, पं.नंदकिशोर पंचोली ,पं.शैलेंद्र उपाध्याय ,पं.राजेश व्यास ,पं.सुरेंद्र व्यास ,पं.राजेंद्र शर्मा ,पं.जीवन पाठक ,पं.दीपक शर्मा,पं.ज्ञानेंद्र भारद्वाज, पं.हितेंद्र जोशी ,पं.लोकेश पुरोहित ,पं.हितेश पुरोहित , पं.नकुल वैष्णव ,पं.विजय भट्ट ,पं.पवन पांडे पं .नरेंद्र शर्मा पं.नरेश शर्मा पं.शैलेंद्र जोशी पं.हरीश ओझा पं.जीतू शिकारी पं.मदन शर्मा पं.हार्दिक शर्मा पं सुरेन्द्र शर्मा पं सुरेश शर्मा पं.अशोक वशिष्ठ पं.विष्णुप्रसाद सुखेड़ा पं.मनमोहन पं.पंकज जोशी पं.अक्षय शर्मा पं.तुषार बैरागी पं.निर्मल दुबे पं.आयुष पंडित पं.रवि पंड्या पं.अमरीश शर्मा पं.महेश पंचेड पं.नविन शर्मा आदि उपस्थित थे।