

मंदसौर नवकार भवन 11 जुलाई 2022 । सेवा धर्म का प्राण और साधना का आधार है सेवा की उपेक्षा करना साक्षात परमात्मा का अपमान करने के समान है उक्त विचार राष्ट्र संत कमलमुनि कमलेश ने संबोधित करते कहा कि एक आत्मा की निस्वार्थ सेवा करना चार धाम की यात्रा से बढ़कर है ।
उन्होंने कहा कि सभी धर्मों की उपासना पद्धति में अंतर होने के बावजूद सेवा को सबने एक स्वर में स्वीकार ही नहीं किया परंतु महापुरुषों ने आत्मसात करके ही महान बने । मुनि कमलेश ने बताया कि जिसके माता-पिता की आंखों से वेदना से गर्म पानी आ जाता है उसका दान और धर्म मुर्दे को शृंगार कराने के समान है ।
राष्ट्रसंत ने बताया कि इतने सारे धर्म ग्रंथ संत मौजूद होने के बावजूद भी दवाई के अभाव में दम तोड़ ना कुपोषण का शिकार होना शिक्षा चिकित्सा का अभाव होना धर्म की दुहाई देने वाले के मुंह पर करारा तमाचा है सरकार के लिए कलंक और शर्मनाक घटना है।
जैन संत ने कहां की हर आत्मा में परमात्मा का निवास है उसको शांति पहुंचाना सबसे बड़ी पूजा और भक्ति है विमल कुमार पामेचा कांतिलाल रातडिया भूपेंद्र भंडारी विनोद मेहता गजराज जैन प्रकाश रातडिया अजय कुमार गरोठ राजेंद्र पामेचा सहित शांत क्रांतसंघ महिला मंडल युवक संघ के वरिष्ठ कार्यकर्ताओं ने राष्ट्रीय संत का आत्मिक अभिनंदन किया 12 जुलाई को प्रात: 9:00 बजे मुनि कमलेश के प्रवचन जीवानगंज जैन दिवाकर मूल भवन में प्रवचन होंगे गौतम मुनि जी ने मंगलाचरण किया ।