बाल तपस्वी कुमारी देशना मूणत के 16 उपवास की पूर्णाहुति पर श्रीसंघ द्वारा बहुमान

रतलाम । दीपावली उल्लास का पर्व है, रक्षाबंधन विश्वास का पर्व है, लेकिन चातुर्मास आत्म विकास का पर्व है। महावीर संघ में चातुर्मास का बहुत महत्व है, महावीर की आज्ञा में चलने वाले सभी सन्त सती चार महीने के लिये एक स्थान पर स्थिरवास करते है । चातुर्मासकाल में संयम की ज्यादा सुरक्षा होती है, इस काल में जीवों की उत्त्पत्ति अधिक होती है, इसलिये चार महीने स्थिर रहने के लिये फरमाया गया है । चातुर्मास में श्रावक श्राविकाओं को 4 बातों का लाभ मिलता है पहला सन्त सतियों के दर्शन का लाभ, दूसरा मंगलपाठ श्रवण का लाभ तीसरा जिनवाणी श्रवण का लाभ चौथा श्रावक के 12 व्रतों में से 12 व्रत सुपात्र दान का लाभ।
जिस स्थान से नदी बहती है उसके चारों और हरियाली छा जाती है, वैसे ही साधु साध्वी के जँहा चरण पड़ते है वँहा श्रावक श्राविकाओं में दान शील तप भाव की हरियाली बढ़ जाती है। गर्मी सर्दी कम पड़े तो एक बार चल सकता है लेकिन बारिश न हो तो नही चल सकता है, यह पृथ्वी सुषमा विहीन हो जाएगी। पानी की बारिश से सड़कों और गटरों का कचरा साफ होता है, चातुर्मास में जीनवाणी रूपी बारिश से मन में से स्वार्थ का कचरा कषायों क्रोध, मान, माया, लोभ की गंदगी साफ हो जाती है।
चातुर्मास काल में बड़े बड़े तप नही कर सको तो कोई बात नही, क्रोध नही करना, अभिमान नही करना, छल कपट नही करना ऐसे संकल्प ले लो, जो भोजन सामने आ जाए उसे प्रसाद समझकर ग्रहण कर लेना । नवकारसी जैसे छोटे तप से भी 100 वर्ष का नारकीय आयुष्य कम होता है, भोजन की थाली धोकर पीने से आयम्बिल का लाभ मिलता है। हम श्रमण नही बन सके कोई बात नही लेकिन श्रावक अच्छे से बन जाए यह भी बहुत बड़ी उपलब्धि है । यह सारगर्भित प्रवचन तप चक्रेश्वरी पूज्याश्री अरुणप्रभा जी म.सा. ने नीमचौक की महती धर्मसभा में फरमाए। पुयाश्री शतावधानी गुरु कीर्तिजी मसा ने फरमाया की घाती कर्मों को तोड़ने के लिये मुक्ति मार्ग की और दौड़ने के लिये भक्ति की और मन को मोड़ने के लिये
परमात्मा से स्वंय को जोड़ने के लिये यह चातुर्मास आया है । सारा संसार स्वार्थी है केवल गुरु ही सच्चा सारथी है। माँ जन्म देती है, गुरु जीवन देता है। गुरु पूर्ण होता है, हर व्यक्ति के जीवन में गुरु जरूरी होता है, जिसके जीवन में गुरु नही उसका जीवन शुरू नही। मेरी गुरुणी मैया का मुझपर अंनत उपकार है जिन्होंने मेरा जीवन सँवारा। मुझे न वाद चाहिए न विवाद चाहिए चाहिए तो बस गुरु का आशीर्वाद चाहिये।
संघ अध्यक्ष सुरेश कटारिया एंव महामंत्री जयंतीलाल डाँगी ने बताया की बाल तपस्वी कुमारी देशना मूणत के आज 16 उपवास पूर्ण होंगे। इस अवसर पर तप का बहुमान तप की बोली 9 उपवास की नेहा अमित कटारिया द्वारा तपस्वी का बहुमान किया गया।

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