



रतलाम । नीमचौक स्थानक पर तप चक्रेश्वरी पूज्याश्री अरुणप्रभा जी मसा के 90 आयम्बिल पूर्ण होने पर भव्य गुणानुवाद सभा सम्पन्न हुई। जिसमें देशभर से गुरुभक्त पधारे।
इस अवसर पर पूज्याश्री शतावधानी गुरु कीर्ति ने फरमाया की गुरुणी मैया का जीवन त्याग और तपस्या का जीता जागता उदाहरण है । पिछले 42 वर्षों से आप लगातार उपवास एंव आयम्बिल तप की आराधना करते रहै है।
हम जब विहार के दौरान छोटे छोटे गाँव व पिछडी बस्तियों से गुजरते है तो कई बार महासती जी ने पानी से रोटी, सुखी रोटी, बासी रोटी और कभी तो पानी में आटा घोलकर भी पी लिया, एक बार खराब रोटी मिल गई तो अगले छः महीने तक चने मुरमुरे पर गुजारा कर लिया, ये सब देखकर हमारी आँखों में आँसू आ जाते है लेकिन आप अपने आयम्बिल तप को दृढ़ता से निभाते है।
पात्रे में बढ़िया गोचरी होने के बावजूद आयम्बिल का रूखा सूखा बिना नमक, मिर्च, तेल मसालो के उबला हुआ भोजन करने के लिये मन को और रसना इन्द्रिय को वश में करना बहुत कठिन कार्य है ।
महासती जी तप के द्वारा कई लब्धियों को भी प्राप्त किया है 12 अक्टूबर 2014 को महासती जी के पैरों में से केसर की वर्षा हुई, हाथों में स्वस्तिक आया, एक पैर में चांद है तो एक पैर में त्रिशूल है। हमनें कई तपस्याएँ देखी होगी लेकिन 12 ही महीने आयम्बिल करना आपने नही देखा होगा। मैं धन्य हुँ मुझे ऐसी गुरुणी मैया मिले।
पूज्या श्री अरुणकीर्ति जी मसा ने फरमाया की मेरे जीवन को सँवारने वाली गुरुणी मैय्या है। सोनू नाम से पूरे सूरत में मेरे चुलबुलेपन को सब जानते थे, रोज जमीकंद खाना, घूमना फिरना, रात्रि भोजन करना, प्रतिदिन पानी पूरी खाना ये ऐसी मेरी मस्ती भरी दिनचर्या थी। फिर 2019 में सूरत में महासतीजी का चातुर्मास हुआ उनके सम्पर्क में आई मासक्षमण किया और आपकी प्रेरणा से आज में भाटे से पाटे पर बैठी हूँ।
मेने आपके कई चमत्कार भक्तों के मुंह से सुने है। रतलाम की ही एक गुरुभक्त के हाथों में 10 वर्ष पहले बहुत दर्द रहता था, असहनीय दर्द कई डॉक्टरों को दिखाया कई दवाईयां चलती थी, वो महासती जी के संपर्क में आए और महासती जी को अपनी तकलीफ के बारे में बताते हुए उनकी आँखें नम हो गई । महासतीजी ने उन्हें छंद सुनाया और कहा अब कोई गोली मत खाना। वो दिन है और आज का दिन उनका दर्द बीमारी सब गायब हो गया है। आज वो गुरुभक्त सभा में मौजूद है।
संघ अध्यक्ष सुरेश कटारिया एंव महामन्त्री जयंतीलाल डाँगी ने बताया की इस शुभ अवसर पर सोने में सुहागा लगाते हुए श्रमण संघ के चतुर्थ पट्टधर आचार्य सम्राट डा शिवमुनि जी द्वारा महासती जी को उपप्रवर्तिनी पदवी से अलंकृत किया गया। श्रीसंघ के महेंद्र बोथरा ने आचार्य सम्राट के पत्र का वांचन किया।
श्रीसंघ द्वारा महासती जी को उपप्रवर्तिनी पद की चादर समर्पित की गई। इस
इस अवसर पर महासती जी के तप की अनुमोदना तप द्वारा करते हुए आज अनिता जी बोराणा के लगातार 50 आयम्बिल पूर्ण हुए। जिनका स्वागत श्रीसंघ द्वारा किया गया।