कर्म संहिता क्यों पढ़ें?

संकलनकर्ता – शैलेन्द्र कुमार जैन
334 , हाईलिंक सिटी , इन्दौर
मो. 9425413847, 7000154181

कर्म संहिता आपके लिए गुरू का, शुभचिन्तक का, मित्र का और वैद्य का रूप धारण कर जीवन पथ को प्रशस्त बनाती है। जो कर्म में लिखा है वही होगा इस अकर्मण्य सोच को पुरुषार्थ के द्वार से प्रकर्ष कराने वाली कर्म संहिता आत्म-विकास की सम्पूर्ण संभावनाओं को उजागर करती है। आपके इन प्रश्नों का Deep, Clear और सही समाधान कर्म संहिता प्रस्तुत करती है।

  • एक मनुष्य काला-कलुटा है तो एक सुन्दर सलौना क्यों है?
  • किसी की बात मानना अच्छा लगता है तो किसी की अच्छी बात भी मानने का मन क्यों नहीं करता?
  • एक व्यक्ति बुद्धिमान है तो एक व्यक्ति निर्बुद्धि क्यों है?
  • मनुष्य गूँगा, बहरा, अंधा, अपंग और बीमार क्यों जन्मता है?
  • निर्णय शक्ति और स्मरण शक्ति कमजोर क्यों हो जाती है? अत्यधिक मेहनत के बावजूद भी अभीष्ट वस्तु का लाभ क्यों नहीं हो पाता ?
  • बनता- बनता कार्य बिगड़ क्यों जाता है?
  • सब कुछ अनुकूल होते हुए भी Depression क्यों है?
  • सबका भला करते हुए भी यश क्यों नहीं मिलता?
  • दु:ख को सुख में हानि को लाभ में और बुरे को अच्छे में कैसे बदला जा सकता है?
  • इलाज करते हुए भी बीमारी पीछा क्यों नहीं छोड़ती?
  • कोई जन्म लेते ही मर जाता है तो कोई युवावस्था में Accident से क्यों मर जाता है?
  • सुख में अनासक्तता और दु:ख में अनाकुलता क्यों नहीं रह पाती ?
  • क्या इस जन्म के बाँधे हुए शुभ-अशुभ कर्म इस जन्म में ही भोगे जाते हैं?
  • क्या सभी कर्मों का फल भोगना जरूरी है?

इन सब बातों के कारण जानने के लिए कल से कर्म संहिता शीर्षक के तहत आपके समक्ष प्रतिदिन एक- एक पोस्ट के माध्यम से कर्म के बारें में समझाने का प्रयास किया जाएगा । सभी पोस्ट संग्रहणीय है ।