लेखक – प्रो.डी.के. शर्मा
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कुछ दिन पूर्व दुनिया को चैंकाने वाला समाचार अमेरिका से आया। वहां के दो बडे़ बैंक आर्थिक संकट के कारण बंद हो गए। यह घटना पूरे विश्व की अर्थ व्यवस्था के लिए एक खतरे की घंटी है। कारण बहुत स्पष्ट है। अमेरिका विश्व की नम्बर एक अर्थव्यवस्था है। विश्व का अधिकतर लेन देन अमेरिका की मुद्रा डॉलर में होता है। विश्व बैंक और अंतराष्ट्रीय मुद्रा संगठन पर भी अमेरिका का ही कब्जा है। अमेरिका ही इन दोनो के प्रमुख की नियुक्ति करता है। ये दोनो संगठन विश्व के देशो को कर्ज देते हैं। इस तरह से अमेरिका पूरी विश्व की अर्थव्यवस्था को प्रभावित करने में सक्षम है। हम यह भी कह सकते है कि विश्व की अर्थव्यवस्था अमेरिका पर निर्भर है। इसलिए अमेरिका के दो बडे़ बैंक के बंद होने की खबर पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था के लिए खतरे की घंटी है। किन्तु दुनिया ने इस खबर को बहुत गंभीरता से नहीं लिया। भारत में सबसे महत्वपूर्ण प्रतिक्रिया भारतीय रिजर्व बैंक के गर्वनर द्वारा की गई। उन्होंने क्रिप्टो करेंसी को बैंक संकट का कारण बताया।
भारत में क्रिप्टोकरेंसी के बारे में बहुत कम लोग, बहुत कम जानते हैं। यह एक ऐसी मुद्रा है जो वास्तविक रूप में अस्तित्व मे है ही नहीं। दुनिया की अन्य मुद्रा की तरह इसे देखा परखा या संकलित नहीं किया जा सकता। उपब्लध जानकारी के अनुसार यह एक जापानी सतोशी नाकामोटो के दिमाग की उपज हैं। इसका अस्तित्व केवल विचार में है, वास्तव में कहीं नहीं। हम यह भी कह सकते है कि क्रिप्टो है भी और नहीं भी।
पूरी दुनिया की बैंकिंग व्यवस्था निश्चित नियम के अनुसार चलती है। करेंसी नोट छापने के लिए एक निश्चित प्रतिशत में सोना रिर्जव बैंक के खजाने में सरकार को जमा कराना पड़ता है। कागज के नोटो की विश्वसनीयता का आधार रिर्जव बैंक के खजाने में रखा यही सोना होता है। विश्व के सभी प्रमुख देश नोट छापने के लिए इसी तरह की प्रणाली का उपयोग करते है। किन्तु क्रिप्टो करेंसी ऐसे किसी सिद्धान्त को नही मानता। इसका कोई वास्तविक आधार है ही नहीं। इसलिए हमारे देश में इसे मान्यता प्राप्त नहीं है। वास्तव में इस तरह की आधारहीन कोई करेंसी चलाना अर्थव्यवस्था के लिए बहुत घातक है। किसी भी दिन देश की अर्थव्यवस्था बर्बाद हो सकती है। किसी भी देश के लिए बिना आर्थिक आधार की मुद्रा का उपयोग करने की कल्पना करना बहुत ही घातक है। ‘ाायद अमेरिका के दो बैंको ने आधारहीन मुद्रा को ही उनके व्यवसाय का आधार बना लिया था। इसी कारण उनके बंद होने की स्थिति आ गई।
पूरे विश्व के बैंको को क्रिप्टो करेंसी के खतरों के प्रति जागरूक रहना चाहिए। बैंको के अधिकतर ग्राहक मध्यम और उच्च मध्यम वर्ग के होते है। अतः जब कोई बैंक क्रिप्टो करेंसी जैसी मुद्रा में व्यवसाय कर अनावश्यक खतरे मोल लेता है तो वह अपने ग्राहकों को भी खतरे में डालता है। भारत सरकार ने क्रिप्टो करेंसी को मान्यता नहीं दी है। यह भारत के बैंक ग्राहकों के लिए अच्छी खबर है। सभी देशो की सरकारों को क्रिप्टो करेंसी जैसी अवास्तविक मुद्रा पर प्रतिबंध लगाना चाहिए। नागरिको के हितो की रक्षा करना सभी सरकारों का कर्तव्य है। अतः बैंको पर कठोर नियंत्रण आवश्यक हैं।