

रतलाम । साहित्यिक संस्था ‘अनुभूति ‘ के संयोजन में वरिष्ठ साहित्यकार एवं भाषाविद् डॉ. जयकुमार जलज के पुण्य स्मरण के अन्तर्गत व्यक्तित्व एवं कृतित्व पर संगोष्ठी श्री अनंत नारायण मंदिर कोठारीवास रतलाम पर सम्पन्न हुई ।
कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए वरिष्ठ साहित्यकार व शिक्षाविद् डॉ. मुरलीधर चांदनीवाला ने कहा कि डॉ. जलज जी ने भाषा विज्ञान, हिन्दी साहित्य के साथ ही अपने मूल जैन धर्म से सम्बंधित कई पुस्तकों की रचना कर देशभर में ख्याति पाई । यदि जलज जी महानगर में होते तो उनकी प्रसिद्ध और व्यापक होती । किन्तु जलजजी ने अपने जीवन व कर्मभूमि को रतलाम ही चुना जो हम सब पर उनका ऋण है ।
अन्तर्राष्ट्रीय अनुवादक व कवि प्रो. रतन चौहान ने कहा कि मैं उनका प्रखर आलोचक रहा कि किन्तु डॉ. जलज ने कहीं पर उनका प्रतिक्रियात्मक स्वरूप नजर नहीं आया । वे हमेशा स्नेह से प्यार करते रहे । उन्होंने इलाहाबाद विश्वविद्यालय में जलज जी के प्रसंगों का स्मरण कराया । पत्रकार व चिंतक श्री विष्णु बैरागी ने कहा कि जलज जी अपनी रचना शीलता में व्यस्त रहते हुए आलोचना से कोसो दूर रहते थे। मौन साहित्य साधना ही उनकी बड़ी पूंजी है । श्री बैरागी ने साथ ही यह भी कहा कि उनका सौभाग्य है कि डॉ. जलज के अवसान के पूर्व उनकी कविताओं की रिकार्डिंग उनके मुल स्वर में करने का अवसर प्राप्त हुआ ।
वरिष्ठ कवि समीक्षक श्री प्रणयेश जैन ने कहा कि जलज जी का रचनाकर्म हमें प्रेरणा देता रहेगा । यद्यपि मेरे और जलज जी के बीच कुछ बिन्दुओं पर वैचारिक मतभेद रहे किन्तु मनभेद कभी नहीं रहे । युवा कवि लेखक श्री आशीष दशोत्तर ने डॉ. जलजजी के प्रेरणादायी मार्गदर्शन को स्मरण करते हुए कहा कि उनका आशीर्वाद मेरे साथ हमेशा रहा । यही कारण है कि मेरा लेखन सशक्त रहा है।
वरिष्ठ गीतकार श्री हरिशंकर भटनागर ने कहा कि उनकी विनम्रता ही साहित्य सृजन की मुख्य धुरी रही है । कहानीकार श्रीमती इन्दु सिन्हा ने कहा जलज जी का ही स्नेह था कि उन्होंने उनकी कहानियों को सराहा था। वरिष्ठ कवि शायर श्री अब्दुल सलाम खोकर ने कहा कि जलज जी का रचना संसार में हमे साहित्य की प्रगतिशील धारा$ का दर्शन मिलता है । संस्था संरक्षक श्री दिनेश जैन ने कहा कि जलज जी ने जैन साहित्य के ग्रंथो का सरल भाषा में अनुवाद कर सबको चौंकाया है । वरिष्ठ पत्रकार व चिंतक पं. मुस्तफा आरिफ ने कहा कि जलज जी से फेसबुक पर आपस में प्रेरणादायी संवाद होता रहता था । श्री रामचन्द्र फुहार ने डॉ्र. जलज के सम्बंध में उनके रौचक स्मरण सुनाएं ।
कार्यक्रम में सर्वश्री रामचन्द्र गेहलोत (अम्बर), लक्ष्मण पाठक, सुभाष यादव,कैलाश वशिष्ठ, प्रकाश हेमावत, अकरम शैरानी, जनमेजय कुमार उपाध्याय, सत्यनारायण पापटवाल आदि साहित्यकार एवं कवि उपस्थित रहे ।
संस्था अध्यक्ष डॉ. मोहन परमार ने डॉ. जलज से सम्बंधित अपने एम.ए. छात्र जीवन से लेकर साहित्य यात्रा के दौरान जलज जी के मार्गदर्शन के संस्मरण सुनाते हुए कार्यक्रम का संचालन किया। कार्यक्रम के अंत में डॉ. जलज के चित्र पर सभी साहित्यकारों ने अपनी पुष्पांजलि अर्पित की।