संविधान में मिले अधिकारों की जानकारी जन-जन तक पहुंचाएं – राष्ट्रसंत कमलमुनि कमलेश

गढ़ सिवाना । आजादी की स्वतंत्रता जब स्वच्छंदता मैं बदल जाती है तब अर्थ का अनर्थ हो जाता है अपने अधिकारों की अभिव्यक्ति में आजादी के साथ दूसरों के अधिकारों का हनन ना हो यही धार्मिकता है । उक्त विचार राष्ट्र संत कमलमुनि कमलेश ने गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या में संबोधित करते कहा कि जिसको अपने अधिकारों का भी ज्ञान नहीं है वह उसका का उपयोग कैसे करेगा उन्होंने कहा कि आजादी के इतने वर्षों बाद भी सामान्य जनता को लोकतंत्र में अपने अधिकारों का ज्ञान ना होना अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है ।
राष्ट्रसंत ने कहा कि जनप्रतिनिधि प्रशासनिक अधिकारी एवं धर्म गुरु का कर्तव्य है कि संविधान में मिले अधिकारों की जानकारी जन-जन तक पहुंचाएं । जैन संत ने स्पष्ट कहा कि गणतंत्र दिवस या स्वाधीनता दिवस मात्र औपचारिकता के रूप में सरकारी समारोह बनकर रह गया है होली दिवाली और ईद से भी बढ़कर जोश उत्साह के साथ मनाना चाहिए
मुनि कमलेश ने कहा कि धर्म से बढ़कर राष्ट्र है देश की सुरक्षा में सबकी रक्षा है सभी धर्मों के ध्वज से बढ़कर राष्ट्रीय ध्वज तिरंगा है मंदिर मस्जिद चर्च गुरुद्वारे के ऊपर तिरंगा लहराना चाहिए 15 अगस्त और 26 जनवरी को जिसको तिरंगे के स्वाभिमान नहीं वह धार्मिक तो क्या इंसान कहलाने का अधिकार भी नहीं ।

Play sound