योग और संगीत एक-दूसरे के समरूप हैं – डॉ. पुरोहित



रतलाम। जिला पुरातत्व पर्यटन एवं संस्कृति परिषद् के प्रयासों से शनिवार की शाम गुलाब चक्कर पर आयोजित कार्यक्रम में नव गायकों की प्रस्तुति और प्रतिष्ठित कलाकारों की उपस्थिति ने वातावरण को राष्ट्रभक्ति और आध्यात्मिकता से सराबोर कर दिया।
विशनित योग संगीत संस्थान के प्रमुख विशाल कुमार वर्मा, नित्येन्द्र आचार्य ने बताया कि योग और संगीत दो ऐसी विद्या हैं जो मनुष्य के शरीर मन और मस्तिष्क को स्वच्छ व स्वस्थ रखने में कारगर थैरेपी हैं। इनका प्रभावी स्वरूप प्रकृति स्वत: सहयोगी रहती है।
कार्यक्रम में प्रकृतिमय योग, संगीत एवं एक्यूप्रेशर चिकित्सा पद्धति का सुंदर समावेश देखने को मिला इस अवसर पर अमृता नीम गिलोय बेल औषधीय पौधों का वितरण किया गया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि जिला सर्किल जेल अधीक्षक श्री लक्ष्मण सिंह भदौरिया एवं पर्यावरणविद् डॉ. खुशाल सिंह पुरोहित रहें। डॉ. पुरोहित ने अपने उद्बोधन में कहा कि योग और संगीत एक-दूसरे के समरूप हैं, जो हमारे जीवन का अभिन्न अंग बनना चाहिए। आज के युग में इनका समावेश अत्यंत आवश्यक है।
इस अवसर पर उपस्थित जनों ने ‘वन्दे मातरम्’ राष्ट्रीय गीत के 150 वर्ष पूर्ण होने पर सामूहिक गान कर राष्ट्रभक्ति की आहूति दी।
कार्यक्रम के दौरान मध्यप्रदेश जन अभियान परिषद्, जिला रतलाम के जिला समन्वयक रत्नेश विजयवर्गीय द्वारा भारत सरकार के ‘वन्दे मातरम्@150’ अभियान की जानकारी दी गई। उन्होंने प्रतिभागियों को ऐप पर फोटो एवं वीडियो अपलोड कर शपथ ग्रहण कराने की प्रक्रिया से भी अवगत कराया।पूरे आयोजन में नगरवासियों की सक्रिय भागीदारी रही और वातावरण “वन्दे मातरम्” की गूंज से गूंज उठा।