रतलाम । आज नीमचौक स्थित श्री जैन दिवाकर स्थानक पर समकित के संग समकित यात्रा विषय पर आगमज्ञाता डॉ समकित मुनि जी मसा ने अपने प्रवचन श्रृंखला के दूसरे दिवस कहा कि जिंदगी अगर एक बगीचा है तो फूल बनो कांटे नही। जिंदगी एक नदी है तो किनारे पर पंहुचना है मझधार में डूबना नही है । कैसी भी सिचुएशन हो लेकिन आपकी इक्वेशन सही होगी तो जिंदगी का कठीन से कठीन सवाल हल हो जाएगा। फूल जैसे जैसे विकसित होता है वो फैलता है विराट होता है जबकि कांटा जैसे जैसे बड़ा होता है वैसे वैसे नुकीला होता जाता है । हमें अपनी सोच को उदार और विराट बनाना है।
जो जीव जिन शासन का दिवाना होता है, मस्ताना होता है वो समकित यात्री होता है । जिन शाशन मतलब देव गुरु धर्म। अरिहंत देव, निग्रँथ साधु गुरु और दया धर्म । जो अरिहंत को मानता है, नवकार को मानता है, अहिंसा करुणा त्याग की भावना रखता है वो जिन शाशन का है, अगर कोई यह बोले की में फंला मान्यता का हुँ तो ये संकुचित विचारधारा है, जिनशासन को मानना विस्तृत विचारधारा है।
समकित यात्री की गुड मॉर्निंग देव गुरु धर्म को याद करने से होती है । अरिहंत मह देवो, जावजजीव सुसाहुणो गुरुणो। अगर गुड मॉर्निंग देव गुरु धर्म को याद करने से हो गई तो उसका दिन अच्छा निकलना ही निकलना है चाहे कितनी भी मुसीबत आ जाए वो उससे पार पा लेता है।
जैसे मकान मजबूत बनाना है तो नींव मजबूत होना चाहिए वैसे ही समकित्व हमारी नींव है, यह जितना मजबूत होगा धर्म के प्रति हमारा नाता उतना ही मजबूत होगा।
जिन शासन के दीवाने छोटी छोटी बातों से मुसीबतों से बिखरते नही है बल्कि निखर कर सामने आते है। आम खाने की बहुत इच्छा थी लेकिन नींबू मिल गए तो जो समकित यात्री होगा वो उस नींबू की भी शिकंजी बना कर पी लेते है।
मांग हमेशा आम की रहती है लेकिन जिंदगी में कई बार नींबू मिल जाते है। आम भी ज्यादा खा लो तो शरीर में गर्मी पैदा कर देते है और नींबू के भी अपने आप में कई गुण है। मन माफिक परिस्थियों में तो सभी खुश रहते है मन के विपरीत परिस्थिति में जो खुश रह सके वो ही समकित यात्री है । पहले तो सास के पास ऑप्शन रहते थे 4-4 बेटों में से किसी के भी पास रह सकती थी अब तो एक ही बेटा होता है उसके ही साथ रहना है चाहे खुश होकर रहो या दुखी होकर। पिछले जन्मों के खराब कर्मो के कारण खराब सास या खराब बहु मिली लेकिन फिर इस जन्म में उनसे लड़ लड़ कर अगले जन्मों के लिए कर्म बाँध रहे हो। घर को कर्मों को खत्म करने की दुकान समझों । घर के अंदर रहते हुए कर्म निर्जरा के कई मौके मिलते है ।
एक छत के नीचे कई आत्माए न जाने कँहा कँहा से आई है इन सबका आपस में ग्राहक और व्यापारी का संबंध है जो की सिर्फ पूर्व जन्मों का लेन देन चुकता करने के लिये आए है कोई हँसाने के लिए कोई रुलाने के लिए,कोई साता पंहुचाने के लिए और कोई आपको सताने के लिए आया है । विपरीत परिस्थियों को सुनहरा अवसर समझो और इस लेन देन को खत्म करने का प्रयास करो संसार सागर को पार करने के लिये लेन देन का अंत करना ही पड़ेगा।
विपरीत परिस्थितियों में जिसमे मन को संभाल लिया उसका बहुत जल्द संसार सागर से बेड़ा पार हो जाएगा। कभी इस बात का अभिमान मत करो की जो कुछ मुझे मिल रहा है वो मेरी मेहनत और परिश्रम व बुद्धि से मिल रहा है, आपकी मेहनत तो है की लेकिन घर में किसकी पुण्याई है ये आप भी नही जानते है ।