


रतलाम। शा. कन्या स्नातकोत्तर महाविद्यालय में वसंत पंचमी के शुभ अवसर पर महाविद्यालय परिवार द्वारा महाविद्यालय के ऑडिटोरियम में मां सरस्वती की भव्य मूर्ति की स्थापना की गई।
कार्यक्रम के आरंभ में अतिथियों द्वारा मां सरस्वती की मूर्ति का अनावरण किया गया तथा दीप प्रज्ज्वलन के साथ अतिथि सत्यवत शास्त्री द्वारा वेदोक्त शास्त्रोक्त मन्त्रोच्चार के साथ मां सरस्वती की प्रतिमा की पूजा, स्थापना की गई । तत्पश्चात संगीत विभाग की छात्राओं द्वारा मां शारदा की ”शारदे सरस्वती, जयति हंसवाहिनी, जयति वीणापाणि सुरमई, सरस वंदनाÓÓ प्रस्तुत कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया गया।
वसंत पंचमी के इस पावन अवसर पर छात्राओं द्वारा प्रसिद्ध गीतकार मधुसूदन जोशी रचित व महाविद्यालय की संगीत विभाग की प्राध्यापिका डॉ. स्नेहा पंडित द्वारा वसंत राग में संगीतबद्ध गीत ”आया वसंत रेÓÓ की मोहक प्रस्तुति ने समां बांध दिया।
कार्यक्रम की अगली कडी में अतिथियों का स्वागत प्राचार्य डॉ मंगलेश्वरी जोशी, डॉ माणिक डांगे, डॉ सुरेश चौहान, डॉ वी एस बामनिया, डॉ अनामिका सारस्वत द्वारा किया गया।
उद्घाटन सत्र के पश्चात कार्यक्रम के विशिष्ट वक्ता व महाविद्यालय के पूर्व प्राध्यापक प्रो. वी. के. जैन ने नेताजी की जयंती पराक्रम दिवस के उपलक्ष्य में नेताजी के जीवन पर प्रकाश डाला व उनके व्यक्तित्व के अनसुने पहलुओं को प्रकाशित किया। साथ ही उन्होंने महाविद्यालय को कुछ पुस्तकें भी भेंट की। मुख्य वक्ता कैलाश व्यास ने अपने वक्तव्य में कहा कि आज त्रिवेणी उत्सव मनाया जा रहा है जिसमें मां का प्राकट्य दिवस, नेताजी का जन्मदिवस व मां सरस्वती के वरद पुत्र श्री निराला का जन्मदिन तीनों मनाएं जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि मां शारदा के हाथ में पुस्तक है, वीणा है, माला है, एक राजा की पूजा उसके राज्य में होती है किंतु विद्या की पूजा सर्वत्र होती है, पुस्तक के माध्यम से मां का यह संदेश हमारे मध्य व्याप्त है। मां के दूसरे हाथ मे माला है जो हमें एकाग्रता का संदेश देती है यदि व्यक्ति के भीतर आत्मीयता, समरसता होगी तो वही वह दूसरों के समक्ष प्रकट करेगा। वसंत का मौसम उल्लास का मौसम है, परंतु विपरीत परिस्थितियों में भी जो आनंद में रहे वह सच्चा मानव है।
अपने अध्यक्षीय उद्बोधन में महाविद्यालय की प्राचार्य डॉ.मंगलेश्वरी जोशी ने कहा कि भारतीय ज्ञान परंपरा के अंतर्गत आज हम नेताजी सुभाष चंद्र बोस की जयंती व वसंतोत्सव मना रहे है। मां वाग्देवी के आशीर्वाद से हम सब लाभान्वित हो, व मां के आशीष को हम अपनी वाणी में धारण कर इसे मन आचरण में उतार कर हमें अपने जीवन को धन्य बनाना है, मां सरस्वती की मूर्ति की स्थापना का हमारा स्वप्न आज पूर्ण हुआ ये बहुत हर्षित होने का विषय है जो मां सरस्वती की अनुकंपा से ही हुआ है।
इस अवसर पर अतिथियों का महाविद्यालय परिवार द्वारा शॉल श्रीफल से स्वागत सम्मान किया गया। कार्यक्रम में महाविद्यालय की वार्षिक पत्रिका ऋचा का विमोचन उसके संपादक मंडल डॉ. स्वर्णलता ठन्ना नागर व छात्राओं हिमशिखा व कृति वारे के साथ अतिथियों द्वारा किया गया।
इस अवसर पर महाविद्यालय के पूर्व प्राध्यापक डॉ अनिल जैन सहित समस्त प्राध्यापक व बडी संख्या में छात्राएं उपस्थित रहीं । कार्यक्रम का संचालन संगीत विभागाध्यक्ष डॉ बी वर्षा ने व आभार अर्थशास्त्र विभागाध्यक्ष डॉ अनामिका सारस्वत ने माना।