अमृत सागर तालाब किनारे स्थित दादावाड़ी के जीर्णोद्धार के पूर्व गुरुदेव की चरण पादुकाएं नवनिर्मित हाल में स्थापित

शीघ्र दादावाड़ी जीर्णोद्धार कार्य होगा पूर्ण

रतलाम। शहर की प्राचीन धरोहर अमृत सागर तालाब के किनारे स्थित दादावाड़ी के प्रस्तावित जीर्णोद्धार से पूर्व गुरुदेवों की पावन चरण पादुकाओं को नवनिर्मित हाल में विधि-विधान एवं पूजा-अर्चना के साथ विधिवत स्थापित किया गया। इस अवसर पर पूरे परिसर में श्रद्धा, भक्ति और धर्ममय वातावरण व्याप्त रहा। जैन श्वेतांबर खरतरगच्छ श्री संघ के तत्वाधान मैं अमृत सागर स्थित दादावाड़ी पर प्रातः 9 बजे विधिकारक पंकज चोपड़ा के सान्निध्य में भजन-पूजन के साथ कार्यक्रम प्रारंभ हुआ।
तत्पश्चात मणिधारी दादा के चरण, दादा गुरुदेव श्री जिनदत्त सूरी जी के चरण तथा श्री जिन कुशलसूरी जी की चरण के अलावा श्री अमृतउदय जी मुनिराज की चरण पादुका एवं अधिष्ठायक देव की स्थापना का पुण्यलाभ विभिन्न लाभार्थी परिवारों ने प्राप्त किया।

बोलियों का विवरण

पहली बोली : मणिधारी दादा के चरण एवं अधिष्ठायक भैरवनाथ जी – ₹81,081 – रविंद्र जी चोरडिया परिवार
दूसरी बोली : दादा गुरुदेव श्री जिनदत्त सूरी जी की चरण पादुका – ₹51,151 – शैतानमल जी बोहरा परिवारस्टेशनरी वाले
तीसरी बोली : दादा गुरुदेव श्री जिन कुशलसूरी जी की चरण पादुका – ₹65,565 – शैतानमल जी बोहरा परिवार
चौथी बोली : श्री अमृत मुनिजी की चरण पादुका – ₹11,111 – मांगीलाल जी चोपड़ा परिवार तथा गुरुदेव की आरती का लाभ रतनलालजी श्रीपाल जी शेलेन्द जी पावेचा 3636 रुपये ने लिया। समाजजनों ने सभी लाभार्थी परिवारों की अनुमोदना करते हुए धर्मकार्य में निरंतर सहयोग की अपेक्षा व्यक्त की।

ऐतिहासिक परिप्रेक्ष्य

दादावाड़ी का इतिहास लगभग 190 वर्ष प्राचीन बताया जाता है। प्रारंभ मेंअमृत मुनि का इस स्थान परदाह संस्कार हुआ। वर्तमान पूज्य जंगम युगप्रधान श्री जिनचंद सूरी जी के गुरुवर श्री जिन विजेंद्र सूरी जी महाराज साहब द्वारा दादागुरु चरणों की स्थापना कराई गई थी। उनकी प्रेरणा से इंदौर के एक लाभार्थी परिवार द्वारा दादावाड़ी का निर्माण कराया गया था। समय के साथ दादावाड़ी जीर्ण-शीर्ण अवस्था में पहुंचने से पुनः नवनिर्माण की आवश्यकता अनुभव की गई। पूज्य पीयूष सागर जी महाराज के मार्गदर्शन में जीर्णोद्धार कार्य प्रारंभ किया जाएगा। प्रथम चरण में नवनिर्मित हाल का निर्माण पूर्ण किया गया है, जिसके चरण पादुकाओं की नियमित पूजा-अर्चना सुचारु रूप से संपन्न हो सके।
दादावाड़ी के पूर्ण निर्माण के पश्चात विधि-विधान से गुरुदेव की पादुकाओं को पुनः स्थापित किया जाएगा।
इस अवसर पर जीर्णोद्धार समिति के अध्यक्ष महेंद्र चोपड़ा ने कहा कि आचार्य पीयूष सागर जी के मार्गदर्शन में शीघ्र ही संपूर्ण जीर्णोद्धार कार्य गति पकड़ेगा और दादावाड़ी अपने भव्य स्वरूप में समाज के समक्ष प्रस्तुत होगी। कार्यक्रम में जैन श्वेतांबर खरतरगच्छ श्रीसंघ के अध्यक्ष अशोक चोपड़ा सहित कांतिलाल चोपड़ा, मनोहर छाजेड़, लोकेश लालन, राजेंद्र कोठारी शैलेश पावेचा, आलोक गांधी, हेमंत बोथरा शरद चोरडिया, राकेश मेहता, जितेंद्र चोपड़ा, पारस चोपड़ा जितेन संचेती, श्रेणिक सराफ, वर्धमान सर्राफ, पूनमचंद धाणीवाल, अशोक दशराज चोपड़ा, कमल नयन लालन अमित कोठारीडॉ. अभय चोपड़ा, कपिल सुराणा, मनीष लालन, विश्वास जिंदाणी, प्रदीप लालन सहित बड़ी संख्या में समाजजन उपस्थित रहे।

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