होली से पहले खेली पंचामृत द्रव्यों के साथ प्रभू संग होली




रतलाम । यूं तो रंगों का त्यौहार आपसी सौहार्द का प्रतीक होता है पर जब संयम ओर भक्ति में के रंग में श्रावक रंगने लगते हैं तो उसके सामने इन कृत्रिम रंगों का कोई मोल नहीं रह जाता है। ऐसा ही परिदृश्य सैलाना मार्ग धामनोद के पास स्थित शीतल तीर्थ पर देखने को प्राप्त हुआ ।
अवसर था तीर्थ के ऐतिहासिक पंचकल्याणक महोत्सव के द्वितीय वार्षिकोत्सव पर आयोजित महामस्तकाभिषेक का । क्षेत्र के व्यवस्थापक ब्र.अशोक भैया ने जानकारी देते हुए बताया कि इस वार्षिक आयोजन में हमें इस बार श्रुत संवेगी 108 श्री आदित्य सागर जी मुनिराज ससंघ के सानिध्य की स्वीकृति प्राप्त हुई तब ही से भक्तों में आयोजन की लेकर उत्साह था । प्रातःकाल आयोजित वार्षिकोत्सव में मुख्य अतिथि के रूप में मध्य प्रदेश शासन के राजस्व मंत्री करण सिंह वर्मा शामिल हुए जहां क्षेत्र कमेटी द्वारा श्री वर्मा का अभिनंदन किया गया । इस अवसर पर क्षेत्र अधिष्ठात्री डॉ सविता दीदी ने अपने उद्बोधन में कहा समाधिस्थ पूज्य गुरुदेव योगीन्द्र सागर जी की प्रेरणा से अभिसिंचित यह क्षेत्र केवल पूजन पाठ का स्थान नहीं यहां मूक प्राणियों को भी संरक्षण प्रदान किया जाता है । हमारे द्वारा गोवंश संरक्षण हेतु 15 गोवंशो से गोशाला प्रारंभ की गई थी जिसकी संख्या आज 270 करीब हो चुकी है, बीमार व दुधारू नहीं होने के कारण जिन गोवंशो को यू ही छोड़ दिया जाता है शीतल तीर्थ गोशाला ऐसे गोवंशो का संरक्षण करती है, पर स्थान अभाव के चलते अब हम संख्या बढ़ा नहीं पा रहे अतः मध्य प्रदेश शासन से यदि भू सहयोग प्रदान करे तो हम अपनी गोशाला को रतलाम की सर्वश्रेष्ठ गोशाला बना सकते है । इंदौर से पधारे ट्रस्टी डॉ अनुपम जैन ने मुनिश्री से निवेदन करते हुए कहा कि पूज्य योगीन्द्र सागर जी मुनिराज जिनवाणी के उपासक थे और आप भी जिनवाणी पुत्र है अतः पूज्य गुरुदेव के जिनवाणी संरक्षण के कार्य को आगे बढ़ाने में आपके निर्देशन की आवश्यकता ट्रस्ट को है । इस अवसर पर राजस्व मंत्री जी ने गोशाला हेतु 1 लाख 51000 की राशि की घोषणा करते हुए भू सहयोग एवं मुख्य सड़क से तीर्थ तक पक्की सड़क निर्माण का आश्वासन भी दिया ।
सभा को संबोधित करते हुए श्रुत संवेगी मुनिश्री आदित्यसागर जी ने अपने प्रवचन में कहा कि संस्कृति के संरक्षण में प्राचीन ग्रंथों का महत्वपूर्ण योगदान होता है जिस प्रकार पूर्वाचार्यों द्वारा प्रणीत ग्रंथों से हम जैन संस्कृति को समझ पा रहे हैं आज प्रकाशित ग्रंथ भविष्य में यही कार्य करेंगें अतः प्रत्येक जिनालय में ताड़पत्र से प्रकाशित एक ग्रंथ अवश्य होना चाहिए क्योंकी ताड़ पत्र वर्षों तक संरक्षित रहता है, शीतल तीर्थ पर भी कुछ ऐसा ही निर्मित हो यह हमारा भाव है । देश व राष्ट्रीय सुरक्षा के साथ-साथ धर्म की रक्षा भी जरूरी है। अशुभ समय आने पर मनुष्य को शांत हो जाना चाहिए। सत्य को प्रताड़ित किया जा सकता है किंतु पराजित नहीं किया जा सकता। जिनके मन पवित्र नहीं है उनको देवालय जाने से कोई फायदा नहीं है।
कैलाश पर्वत पर हुआ महामस्तकाभिषेक
तीर्थ प्रवक्ता राकेश पोरवाल ने बताया कि प्रातःकाल से ही महिला पुरुष शुद्ध वस्त्रों में क्षेत्र पर एकत्रित होने लगे । मांगलिक श्लोकों के साथ अभिषेक क्रिया प्रारंभ की गई । पूज्य मुनि संघ की उपस्थिति में रतलाम, इंदौर, कोटा, भीलवाड़ा, जयपुर, भोपाल एवं विभिन्न शहरों से आए श्रावक श्राविकाओं ने जल,दूध, दही, केसर, हल्दी के साथ, नारियल, स्ट्राबेरी, इच्छुरस सहित विभिन्न फलों रसों से 17 फुट पद्मासन श्री आदिनाथ भगवान का अभिषेक किया । जो भी वेदिका पर जा रहा था विभिन्न सुगंधित पदार्थों से रंग का बाहर आ रहा था । मानो होली से पहले ही शीतल तीर्थ पर भक्तों ने भगवान संग होली खेली हो । रतलाम ग्रामीण विधायक मथुरा लाल डामर, पूर्व महापोर पारस सकलेचा, राहुल पंजाबी, सौरभ जैन सहित श्रद्धालु मौजूद थे।