होली पर व्यंग्य
प्रो. देवेन्द्र कुमार शर्मा
जब भी कुछ लोग इकट्ठा होते हैं, करने के लिए, तब किसी न किसी तरह रिश्वतखोरी पर चर्चा हो ही जाती हैं। सभी एकमत होकर रिश्वतखोरी की बुराई करते हैं। रिश्वतखोरी को बुरा बताते हैं। हम में से कई लोगों ने वो दिन देखे हैं जब रिश्वतखोरी सचमुच में बुरा मानी जाती थी। रिश्वतखोर व्यक्ति भी कम ही दिखाई देते थे। समय के साथ रिश्वत का प्रचलन बढ़ता गया। किसी एक क्षेत्र में नहीं अनेक क्षेत्रों में इसकी शुरूआत सरकारी कर्मचारियों से हुई। अब यह अनेक क्षेत्रों में प्रचलित हो गई है। रिश्वतखोरी पर जब भी चर्चा होती है सभी इस प्रथा की आलोचना करते हैं। जो व्यक्ति रिश्वतखोरी में सक्रिय भागीदार होते है वे भी सार्वजनिक रुप से रिश्वतखोरी की बुराई करते हैं।
किन्तु निष्पक्ष रूप से विचार करें तो रिश्वतखोरी उतनी बुरी भी नहीं दिखाई देती है, होली के अवसर पर तो बिल्कुल भी नहीं। होली के व्यंग्य के रूप में विचार करें तो समझने में आ जाता है कि रिश्वतखोरी उतनी बुरी भी नहीं। वैसे रिश्वतखोरी को भ्रष्टाचार कहें तो उसका क्षेत्र अधिक विस्तृत हो जाता है। शायद रिश्वतखोरी के प्रारंभ में केवल पैसे के लेन-देन को ही रिश्वतखोरी माना जाता होगा। समय के साथ रिश्वतखोरी के स्वरूप और क्षेत्र में विस्तार होता गया।अब नगद धन के अलावा भी रिश्वतखोरी में नए-नए क्षेत्र बन गए हैं।आजकल समाज में रिश्वतखोरी के विस्तृत विस्तार से सभी परिचित हैं।जो लोग रिश्वतखोरी से लाभ उठाते हैं वे भी इसकी आलोचना करने में आगे रहते हैं। अब रिश्वतखोरी के सीमित अर्थ से समय बहुत आगे निकल चुका है, अब शायद भ्रष्टाचार उसके विस्तृत अर्थ में माना जाने लगा है।
वैसे विचार करें तो भ्रष्टाचार का मूल स्वरूप अभी भी धन का आदान-प्रदान ही है।सब इसकी बुराई करते हैं लेकिन ईमानदारी से विचार करें तो रिश्वतखोरी इतनी बुरी भी नहीं है। वर्तमान में आम नागरिक का संपर्क बहुत अधिक सरकारी विभागों से होता आया है। अनेक योजनाएं सरकार की चलती है। जिनके लिए आम नागरिक को कई बार बहुत भागदौड़ करनी पडती है, बहुत कठिनाई होती हैं, बहुत पसीना बहाना पड़ता हैं, समय भी बहुत लगता है। परेशानियां भी बहुत होती हैं। उनसे अगर बचना है तो थोड़ी सी रिश्वत दे दो, भाग दौड़ भी बच जाएगी और काम भी आसानी से हो जाएगा। छोटी सी रिश्वत जीवन को सुविधाजनक बना देती है। समय और मेहनत दोनों बचते हैं। रिश्वतखोरी अच्छी हुई है या नहीं, जीवन को सरल बनाया है या नहीं निश्चित रूप से कुछ भी नहीं कह सकते। वैसे तो लेने और देने वाला दोनों रिश्वतखोरी को बुरा कहते हैं किन्तु छोटी सी रिश्वत जीवन को आसान बनाती है। यह एक ऐसा सच है जिसे कोई स्वीकारने को तैयार नहीं होता, किन्तु होली के आनंद उत्सव के समय तो इस रिश्वतखोरी की उपयोगिता को स्वीकार किया जा सकता है। पूरा वर्ष पढ़ा है रिश्वतखोरी की बुराई करने के लिए किन्तु होली पर तो सच स्वीकार कर ही लेना चाहिए। एक छोटा सा नोट बड़ी समस्या हल कर देता है, स्वीकार करना ही होगा? बड़ी-बड़ी समस्या आसानी से सरल हो जाती है ? रिश्वतखोरी के क्षेत्र का विस्तार भी अनंत हो गया है। शिक्षा जैसा पवित्र क्षेत्र भी रिश्वतखोरी को अपना चुका है? असंभव को संभव रिश्वत कर देती है फिर होली पर तो हमें स्वीकार कर ही लेना चाहिए कि रिश्वतखोरी अच्छी है? जीवन को सुविधाजनक बनाती है? वैसे हम इसके पक्षधर नहीं, तकलीफे चाहे जितनी हो। किन्तु दृष्टिकोण बदलता जा रहा है, न कोई रिश्वत देना बुरा मानता है न लेना बुरा। जैसे होली पर कोई रंग डाल दे तो बुरा नहीं मानते वैसे ही रिश्वत के सच को होली के व्यंग्य के रुप में स्वीकार कर लेना चाहिए ? जैसे बीमारी को ठीक करने के लिए हम कड़वी दवाई पीते हैं वैसे ही रिश्वत को भी स्वीकारते हैं? बड़ी-बड़ी उलझनें रिश्वत से सुलझ जाती है, यह कड़वा सच होली के रंग की तरह स्वीकार कर लेना चाहिए।
होली के रंगों की तरह भ्रष्टाचार के स्वरूप भी बहुरंगीय हो गए हैं और इनका आनंद लेने वाले भी अनगिनत। हम तो केवल होली के रंगों की तरह आनंद लेने के लिए चर्चा कर रहे हैं। होली के रंगों को छुड़ाना बहुत कठिन होता है किन्तु भ्रष्टाचार को छिपाना आसान। जैसे रंगों से होली खेलने का आनंद होली खेलने वाले ही जानते है वैसे ही भ्रष्टाचार का बहुरंगीय स्वाद भ्रष्टाचार में लिप्त लोग ही जानते हैं। होली के रंगों की तरह भ्रष्टाचार के रंग भी अनेक। जैसे होली खेलते समय कोई भेद नहीं रहता, वैसे ही भ्रष्टाचार अब सर्वस्वीकार्य हो गया है। जैसे होली का रंग गुदगुदाता है वैसे ही भ्रष्टाचारी को भ्रष्टाचार आनंद देता है। उसके आनंद की तुलना गूंगे के गुड़ से भी की जा सकती है। जैसे एक गूंगा व्यक्ति मीठा खाकर उसके आनंद को केवल अनुभव कर सकता है उसी तरह भ्रष्टाचार का आनंद है। ईमानदारी से कमाया धन शायद उतना आनंद नहीं देता जितना भ्रष्टाचार से प्राप्त सुख।
होली के पावन अवसर पर भ्रष्टाचार की होली खेलने वाले अपने मन को पश्चाताप के रंग से पवित्र कर सकते हैं। कोई बुरा ना माने यह केवल होली का हुड़दंग है।
होली की शुभकामना सहित…