म राज्य में सुविधाएं नीचे से ऊपर की और जाती हैं, राजा का कार्य प्रजा की सेवा करना होता हैं

रतलाम । राम कथा भारत भूमि का ऐसा दस्तावेज,जिसकी सत्यता पर कोई संदेह नहीं हो सकता राम और कृष्ण जैसे अवतारों के कारण ही आज सनातन धर्म संस्कृति की ध्वजा पूरी दुनिया में फहरा रही हैं। महर्षि परशुराम ब्राह्मण सहकारी साख संस्था मर्यादित रतलाम कार्यालय पर प्रति रविवार को श्रीराम अमृत वचन वाणी पर श्री श्री 1008 स्वामी आत्मानंद जी सरस्वती दण्ड़ी स्वामी जी द्वारा काम,मोह, माया पर आप नियंत्रण पा सकते हो। किन्तु अहंकार से नियंत्रण पाना मुश्किल हैं। अहंकार पर विजय प्राप्त करने के लिए मुर्दे की तरह जीवन जीना हैं। कोई कुछ भी कहें आपको उस बात पर ध्यान नहीं देना हैं। तब जाकर आप अहंकार पर विजय प्राप्त कर सकते हैं। जैसे पानी में जीवित मनुष्य डूब जाता हैं। और मुर्दा शरीर पानी पर तैरता हैं। दूसरे की प्रतिष्ठा को नीचे गिराने की प्रयास करने वाला अधर में लटक जाता हैं।
श्रीराम चरित मानस की शिक्षा हैं। सुलोचना जब अपने पति मेघनाथ का शव रणभूमि में लेने गई तो सुलोचना ने लक्ष्मण से कहा कि यह युद्ध मेरे पति मेघनाथ और लक्ष्मण के बीच ना होकर दो परम सती नारियों के बीच युद्ध था। जिसमें उर्मिला का सतीत्व विजय हुआ। क्योंकि उनके पति लक्ष्मण धर्म के साथ थें। और सुलोचना के पति मेघनाथ पाप रुपी रावण के साथ थें। कालनेमी काल चक्र होता हैं। जिसमें विषय रुपी तालाब में जीव को काम रुपी मगर जकड़ लेता हैं। परन्तु प्रभु की शरण में आने से काम एवं विषय रुपी मगर से शंकराचार्य जी, गजेन्द्र (मोक्ष), उद्धार हुआ एवं हनुमान जी ने विषय रुपी मगर को प्रभु की उपासना में बदल दिया। जीव प्रारब्ध से प्राप्त शक्ति के अहंकार में डूब कर प्रेरक शक्ति को भूल जाता हैं। अतः जीवन में जब अहंकार का नष्ट नहीं हो जाता प्रभु की शरण नहीं मिलती हैं। राम राज्य में सेवा सुविधाएं नीचे से ऊपर की और जाती हैं। राजा का दायित्व जनता की सेवा करना हैं। अपनी सेवा करना नहीं।
इस अवसर पर महर्षि परशुराम ब्राह्मण सहकारी साख संस्था द्वारा पं. प्रकाश जी सांवरिया (शर्मा) का रतलाम शहर में सनातन धर्म संस्कृति का प्रसार युवाओं में धर्म के प्रति जागरूकता और सामाजिक समरसता की स्थापना के लिए निरन्तर कई वर्षों से किए जा रहे निस्वार्थ अथक प्रयासों के लिए संस्था द्वारा अध्यक्ष पं. संदीप जी व्यास द्वारा शाल, श्रीफल और पुष्प माला से अभिनन्दन किया गया। इस अवसर पर उनके द्वारा समाज में विभिन्न विषयों की जैसे कानूनी, वित्तीय, स्वास्थ्य, रोजगार के विशेषज्ञों से मार्गदर्शन हेतु समिति कार्यालय में प्रतिमाह बैठक आयोजित करने और सहयोग करने का पूर्ण आश्वाशन दिया। पं. हर्ष जी व्यास,पं. धुलचन्द जी सारस्वत,पं. संजय दवे,पं. सुनील दुबे,पं. सुनील गौतम,पं. राजेन्द्र कुमार जोशी,पं. सत्येन्द्र जोशी,पं. खुबीराम शर्मा,पं. संजीव शर्मा,पं. विजय हेमकांत शर्मा, बैरागी जी, जी एस जोधा,श्रीमती अनुसुइया जोशी, श्रीमती सरोज जोशी, श्रीमती सीमा जोशी, कार्यक्रम का संचालन डॉ मुनिन्द्र दुबे द्वारा किया गया। एवं संस्था अध्यक्ष पं. संदीप जी व्यास आर्थिक सामाजिक, शैक्षणिक एवं स्वास्थ्य संबंधी गतिविधियों की जानकारी प्रदान की। एवं गतिविधियों में शामिल होने के सभी से आह्वान किया

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